विस्तृत उत्तर
सिद्धि योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में षोडश योग है। यह सफलता और सिद्धि का सर्वोत्तम प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'सिद्धि' = सफलता, उपलब्धि। यह योग आरंभ किए गए हर कार्य में सफलता का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 200° से 213°20' के बीच होते हैं, तब सिद्धि योग होता है।
स्वामी देवता — गणेश/विश्वदेव।
शुभाशुभ फल — यह अत्यंत शुभ योग है। पृथ्वी-तत्व का यह योग 'जड़' पकड़ने वाला होता है — किया गया निवेश स्थायी रूप से लाभ देता है। इस योग में आरंभ किया गया कार्य अवश्य सफल होता है।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति सभी प्रकार के कार्यों में चतुर और सफल होते हैं। इन्हें सुंदर और बुद्धिमान जीवनसाथी मिलता है। प्रचुर मात्रा में धन की प्राप्ति होती है और सुखमय जीवन व्यतीत करते हैं।
मुहूर्त में प्रयोग — नया व्यापार, परीक्षा, साधना, दीर्घकालीन निवेश और महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सर्वोत्तम।





