विस्तृत उत्तर
इन्द्र योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में षड्विंश (26वाँ) योग है। यह नेतृत्व, ऐश्वर्य और राजसी शान का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'इन्द्र' = देवराज, श्रेष्ठ। यह योग नेतृत्व क्षमता, प्रभुत्व और वैभव का बोधक है।
गणना विधि — सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों का योगफल जब 333°20' से 346°40' के बीच होता है, तब इन्द्र योग होता है।
स्वामी देवता — देवराज इन्द्र।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में नेतृत्व कार्य, राजकीय कार्य, पुरस्कार ग्रहण, व्यापार और कूटनीतिक निर्णयों के लिए अत्यंत उत्तम। शक्ति और सत्ता से जुड़े सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
जन्म-फल — इन्द्र योग में जन्मे व्यक्ति नेतृत्व क्षमता से संपन्न, धनवान और राजसी ठाठ वाले होते हैं। ये स्वभाव से प्रभावशाली, महत्वाकांक्षी और सफल होते हैं। प्रशासन, राजनीति और उद्योग में शीर्ष पदों पर पहुँचते हैं। इनकी आज्ञा का पालन होता है और ये अपने क्षेत्र में 'इन्द्र' की भाँति राज करते हैं। इनके पास ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं होती।
स्वास्थ्य — सामान्यतः स्वस्थ और ऊर्जावान। किंतु अहंकार से बचना आवश्यक है।
करियर — राजनीति, प्रशासन, सेना, न्यायपालिका और बड़े व्यवसाय में विशेष सफलता।
मुहूर्त में प्रयोग — पदारोहण, चुनाव, पुरस्कार ग्रहण, नई परियोजना का उद्घाटन और नेतृत्व-कार्य के लिए सर्वोत्तम।





