विस्तृत उत्तर
अतिगण्ड योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में षष्ठ योग है। यह 9 अशुभ योगों में से एक है।
नाम का अर्थ — 'अति' = अत्यधिक और 'गण्ड' = गला/ग्रंथि (अशुभ/बाधाकारक)। यह योग अत्यधिक बाधाओं और खतरे का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 66°40' से 80° के बीच होते हैं, तब अतिगण्ड योग होता है।
स्वामी देवता — चंद्रमा।
शुभाशुभ फल — यह अशुभ योग है। इस योग में विवाह, गृह प्रवेश, नई यात्रा और व्यापार आरंभ वर्जित हैं।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति साहसी होते हैं, धर्म के कार्यों को करना पसंद करते हैं किंतु विलासी भी होते हैं। इन्हें तामसिक भोजन अधिक पसंद होता है। यदि गलत संगत से बच जाएं तो जीवन में सफलता मिलती है। दुर्घटना और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना चाहिए।
शांति उपाय — चंद्र-पूजन और शिव-अभिषेक इस योग के दोषों को कम करते हैं।





