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अशुभ योग से जुड़े सभी प्रश्न(9)

अशुभ योग पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 9 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पंचांग एवं ज्योतिष

वैधृति योग क्या होता है?

वैधृति 27 नित्ययोगों में 27वाँ और अंतिम, 9 अशुभ योगों में व्यतिपात के साथ सर्वाधिक अशुभ। 'विपरीत धारणा-उतार-चढ़ाव'। सूर्य-चंद्र योगफल 346°40'–360°। स्वामी वरुण। सभी मांगलिक कार्य वर्जित। वैधृति श्राद्ध विशेष फलदायी।

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पंचांग एवं ज्योतिष

परिघ योग क्या होता है?

परिघ 27 नित्ययोगों में 19वाँ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'बाड़ा-अवरोध' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 240°–253°20'। स्वामी विश्वकर्मा। यात्रा-व्यापार वर्जित। जन्म में बुद्धिमान, बहुज्ञ, आध्यात्मिक झुकाव।

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व्यतिपात योग क्या होता है?

व्यतिपात 27 नित्ययोगों में सप्तदश, 9 अशुभ योगों में सर्वाधिक भयंकर। 'विनाशकारी-आपदा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 213°20'–226°40'। स्वामी रुद्र। सभी शुभ कार्य वर्जित। व्यतिपात श्राद्ध विशेष फलदायी।

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वज्र योग क्या होता है?

वज्र 27 नित्ययोगों में पंचदश, 9 अशुभ योगों में से एक। 'कठोरता-आकस्मिक आपदा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 186°40'–200°। स्वामी इंद्र। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में कठोर, निर्भीक, अचानक उतार-चढ़ाव।

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व्याघात योग क्या होता है?

व्याघात 27 नित्ययोगों में त्रयोदश, 9 अशुभ योगों में से एक। 'विघ्न-आघात' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 160°–173°20'। स्वामी वायु। लंबे निवेश और विवाह वर्जित। जन्म में साहसी, किंतु बाधा-पूर्ण जीवन।

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गण्ड योग क्या होता है?

गण्ड 27 नित्ययोगों में दशम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अवरोध-ग्रंथि' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 120°–133°20'। स्वामी अग्नि। महत्वपूर्ण कार्य और निवेश वर्जित। जन्म में मेधावी, संघर्षशील, प्रशासन-कुशल।

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शूल योग क्या होता है?

शूल 27 नित्ययोगों में नवम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'तीव्र पीड़ा-बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 106°40'–120°। स्वामी सर्प। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में कठोर, संघर्षशील, दृढ़ इच्छाशक्ति।

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अतिगण्ड योग क्या होता है?

अतिगण्ड 27 नित्ययोगों में षष्ठ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अत्यधिक बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 66°40'–80°। स्वामी चंद्रमा। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में साहसी, धर्मप्रेमी, किंतु दुर्घटना-सावधान।

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विष्कुम्भ योग क्या होता है?

विष्कुम्भ 27 नित्ययोगों में प्रथम और 9 अशुभ योगों में एक है। 'विष + कुम्भ' = जहर का घड़ा। सूर्य-चंद्र योगफल 0°–13°20' पर होता है। स्वामी यक्ष। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में प्रभावशाली किंतु शत्रु-पीड़ित।

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