विस्तृत उत्तर
वज्र योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में पंचदश योग है। यह 9 अशुभ योगों में से एक है।
नाम का अर्थ — 'वज्र' = इंद्र का वज्र, अत्यंत कठोर। यह योग कठोरता, कठिनाइयों और विद्युत-जैसी आकस्मिक आपदाओं का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 186°40' से 200° के बीच होते हैं, तब वज्र योग होता है।
स्वामी देवता — इंद्र।
शुभाशुभ फल — यह अशुभ योग है। इस योग में विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ और लंबी यात्रा से बचना चाहिए।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति कठोर, निर्भीक और शक्तिशाली होते हैं। जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव आते हैं। ये किसी के आगे झुकते नहीं। वज्र की भांति ये दृढ़ और अपनी बात पर अटल रहते हैं। शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होते हैं।
शांति उपाय — इंद्र-पूजन, पर्जन्य सूक्त पाठ और देवराज इंद्र की उपासना उपयोगी है।





