विस्तृत उत्तर
आयुष्मान योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में तृतीय योग है। यह दीर्घायु और स्वास्थ्य का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'आयुष्मान' = दीर्घायु। यह योग दीर्घ जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 26°40' से 40° (1 राशि 10°) के बीच होते हैं, तब आयुष्मान योग होता है।
स्वामी देवता — मृत्युंजय (रुद्र/शिव)।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। नया कार्य आरंभ, औषधि सेवन, विवाह, यात्रा और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए यह योग उत्तम माना जाता है।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति दीर्घायु, स्वस्थ और जीवन में सभी सुख प्राप्त करने वाले होते हैं। ये ऊर्जावान, महत्वाकांक्षी और व्यवहार कुशल होते हैं। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है।
मुहूर्त में प्रयोग — स्वास्थ्य संबंधी कार्य, औषधारंभ, दीर्घकालीन परियोजना शुरू करने के लिए उत्तम।





