विस्तृत उत्तर
सुकर्मा योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में सप्तम योग है। यह शुभ कर्मों और सफलता का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'सु' = अच्छा/उत्तम और 'कर्मा' = कर्म। अर्थात् उत्तम कार्यों का योग।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 80° से 93°20' के बीच होते हैं, तब सुकर्मा योग होता है।
स्वामी देवता — इन्द्र।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में आरंभ किए गए कार्य सफल होते हैं।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति धर्मपरायण, परिश्रमी और सत्कर्मों में लगे रहने वाले होते हैं। ये समाज में अच्छे नाम और यश पाते हैं। इन्हें कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है। ये नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं और इंद्र की तरह शक्तिशाली व्यक्तित्व रखते हैं।
मुहूर्त में प्रयोग — धार्मिक कार्य, नई परियोजना आरंभ और सामाजिक कार्यों के लिए उत्तम।





