विस्तृत उत्तर
श्रीरामजी के जन्म के समय अभिजित् मुहूर्त था — जो भगवान को अत्यन्त प्रिय है।
चौपाई — 'नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥'
अर्थ — पवित्र चैत्रका महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्लपक्ष और भगवानूका प्रिय अभिजित् मुहूर्त था।
अभिजित् मुहूर्त दिन का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है — यह मध्याह्न (दोपहर) के आसपास होता है। बालकाण्ड में कहा — 'मध्य दिवस अति सीत न घामा' — दोपहर का समय था, न अधिक सर्दी थी न गर्मी। यह सबसे अनुकूल और शान्तिदायक समय था।





