ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

नक्षत्र — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

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संस्कार विधि

नामकरण संस्कार में नाम रखने के शास्त्रीय नियम क्या हैं?

नामकरण नियम: जन्म नक्षत्र अक्षर, ब्राह्मण=शर्मा/क्षत्रिय=वर्मा/वैश्य=गुप्त (मनुस्मृति), सम अक्षर (2,4) शुभ, देवता/शुभ अर्थ, सरल उच्चारण, गोपनीय+लौकिक दो नाम। पिता कान में बोले → शहद से 'ॐ' लिखें।

नामकरणसंस्कारनाम
मुहूर्त एवं योग

गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

गुरु पुष्यनक्षत्रखरीदारी
मुहूर्त एवं योग

रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

रवि पुष्यनक्षत्रशुभ योग
मंत्र जप ज्ञान

जन्म नक्षत्र के अनुसार मंत्र का चयन कैसे करें?

27 नक्षत्र = 27 देवता। जन्म नक्षत्र → नक्षत्र देवता → मंत्र। आर्द्रा=रुद्र='ॐ नमः शिवाय', स्वाति=वायु=हनुमान। ज्योतिषी/गुरु से कुंडली→इष्ट→मंत्र। ज्योतिष आधारित।

नक्षत्रजन्ममंत्र

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।