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रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

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रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

  1. 1इस दिन की गई पूजा का फल अनन्त गुना।
  2. 2नवग्रह शान्ति पूजा अत्यन्त फलदायी।
  3. 3लक्ष्मी-नारायण पूजा — धन प्राप्ति।
  4. 4सूर्य पूजा — तेज, आरोग्य, मान-सम्मान।
  5. 5मंत्र दीक्षा/अनुष्ठान आरम्भ।
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