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मुहूर्त एवं योग📜 मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र2 मिनट पठन

अमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान है

संक्षिप्त उत्तर

अमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह 'सिद्धि', यह 'अमृत (शाश्वत) फल'।

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विस्तृत उत्तर

अमृत सिद्धि योग अत्यन्त शुभ और दुर्लभ मुहूर्त योग है।

कब बनता है

विशिष्ट वार + विशिष्ट नक्षत्र के संयोग से। प्रमुख संयोग:

  • रविवार + हस्त
  • सोमवार + मृगशिरा
  • मंगलवार + अश्विनी
  • बुधवार + अनुराधा
  • गुरुवार + पुष्य
  • शुक्रवार + रेवती
  • शनिवार + रोहिणी

पूजा का विधान

  1. 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र → पूजा स्थल।
  2. 2इष्टदेवता की विशेष पूजा — सभी उपचार सहित।
  3. 3मंत्र जप — इस योग में जप शीघ्र सिद्ध होता है।
  4. 4हवन — गायत्री/इष्ट मंत्र से।
  5. 5दान — इस दिन का दान अमृत (अक्षय) फलदायी।

विशेष लाभ

  • 'अमृत' = अक्षय, अनश्वर। इस योग में किया कर्म = अमृत (शाश्वत) फल।
  • मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, अनुष्ठान, दीक्षा — सर्वोत्तम।
  • गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार — शुभ।
  • रोग निवारण हेतु औषधि सेवन आरम्भ।

सर्वार्थ सिद्धि से भेद

सर्वार्थ सिद्धि = सभी कार्य सिद्ध। अमृत सिद्धि = कार्य का फल अमृत (शाश्वत/अक्षय)। दोनों अत्यन्त शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र
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