अमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान है
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अमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह 'सिद्धि', यह 'अमृत (शाश्वत) फल'।
- 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र → पूजा स्थल।
- 2इष्टदेवता की विशेष पूजा — सभी उपचार सहित।
- 3मंत्र जप — इस योग में जप शीघ्र सिद्ध होता है।
- 4हवन — गायत्री/इष्ट मंत्र से।
- 5दान — इस दिन का दान अमृत (अक्षय) फलदायी।
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