विस्तृत उत्तर
योग का सही अर्थ जीव को परमार्थ तत्त्व का ज्ञान प्राप्त होना बताया गया है। चित्त की एकाग्रता सर्वदा शिव के अनुग्रह से होती है। आगे चित्त की वृत्तियों पर नियंत्रण करना भी योग कहा गया है। योग-साधना से प्राप्त निर्वाण माहेश्वर पद कहलाता है और उस निर्वाण का हेतु रुद्र का ज्ञान है। इसलिए योग केवल आसन नहीं, बल्कि शिवकृपा से होने वाला ज्ञान, चित्तनियंत्रण और मुक्तिपथ है।
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