विस्तृत उत्तर
प्राणायाम से शान्ति, प्रशान्त, दीप्ति और प्रसाद नामक चार सिद्धियाँ या अवस्थाएँ बताई गई हैं। सतत प्राणायाम से दोष नष्ट होते हैं और श्वास की गति न्यून होती जाती है। प्राणों के नियंत्रण से क्रमशः दिव्य शान्ति आदि सिद्धियाँ प्राप्त होने लगती हैं। सहज और आगन्तुक पापों का नाश शान्ति है, वाणी पर संयम प्रशान्त है, सर्वदा प्रकाश की स्थिति दीप्ति है और इन्द्रियों, बुद्धि तथा प्राणवायु की प्रसन्नता प्रसाद है।
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