विस्तृत उत्तर
कुम्भक के साथ शिव ध्यान सुषुम्णा मार्ग से किया जाता है। साधक शरीर के भीतर सुषुम्णा मार्ग से क्रमशः बारह मात्रात्मक मन्द कुम्भक, चौबीस मात्रात्मक मध्यम कुम्भक और छत्तीस मात्रात्मक उत्तम कुम्भक द्वारा कल्याणप्रद, शुद्ध, देवस्वरूप और ज्ञानसम्पन्न प्रभु शंकर का ध्यान करे। हृदयकमल और नाभिकमल में ध्यान केन्द्रित कर बत्तीस मात्रात्मक रेचक भी बताया गया है। अथवा रेचक और पूरक छोड़कर केवल कुम्भक में स्थिर रहकर हृदय में साक्षात् शिव का ध्यान किया जा सकता है।
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