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विस्तृत उत्तर
स्वाध्याय में प्रणव का जप बताया गया है। पाठ में कहा गया है कि प्रणव का जप स्वाध्याय है और वह तीन प्रकार का होता है। वाचिक जप अधम, उपांशु यानी मंद स्वरात्मक जप उत्तम और मानस जप उत्तमोत्तम बताया गया है। इसी प्रसंग में मन, वचन और शारीरिक क्रियाओं से शिव का प्रणिधान तथा गुरु के प्रति निश्चल भक्ति को शिव-ज्ञान कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 44-45, श्लोक 39-42
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