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योग का स्वरूप📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41, श्लोक 3-6⏱ 1 मिनट पठन

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

चित्त की एकाग्रता, रुद्र का ज्ञान और निर्वाण शिव की कृपा से बताए गए हैं।

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विस्तृत उत्तर

शिव की कृपा से योग और मुक्ति का मार्ग खुलता है। चित्त की एकाग्रता उन्हीं शिव के अनुग्रह से होती है। उनका अनुग्रह स्वानुभव का विषय है और ब्रह्मा आदि भी उसके स्वरूप का वर्णन नहीं कर सकते। योग-साधना से प्राप्त निर्वाण माहेश्वर पद कहा गया है। उस निर्वाण का हेतु रुद्र का ज्ञान है और वह ज्ञान उन्हीं की कृपा से होता है। इन्द्रियों और चित्तवृत्तियों पर नियंत्रण रखने वाले साधक को योगसिद्धि मिलती है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41, श्लोक 3-6
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है को संदर्भ सहित समझें

शिव की कृपा से योग और मुक्ति कैसे मिलती है का सबसे सीधा सार यह है: चित्त की एकाग्रता, रुद्र का ज्ञान और निर्वाण शिव की कृपा से बताए गए हैं।

योग का स्वरूप जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41, श्लोक 3-6 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 41, श्लोक 3-6 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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