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गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

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गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

  1. 1बृहस्पति (गुरु) = देवगुरु, ज्ञान-धन-सौभाग्य का कारक।
  2. 2पुष्य = पोषण, वृद्धि, समृद्धि का नक्षत्र।
  3. 3दोनों का संयोग = धन-समृद्धि-ज्ञान का सर्वोत्तम मुहूर्त।
  4. 4स्वर्ण, चाँदी, हीरा, रत्न खरीदना सर्वोत्तम — 'अक्षय' फल।
  5. 5सम्पत्ति (भूमि, मकान) खरीद।
  6. 6वाहन खरीद।
  7. 7नया व्यापार/दुकान/कार्यालय उद्घाटन।
  8. 8नई औषधि, नया पाठ्यक्रम आरम्भ।
  9. 9बृहस्पति/गुरु पूजा — पीले वस्त्र, पीले फूल, चना दाल, हल्दी।
  10. 10विष्णु/लक्ष्मी पूजा — धन प्राप्ति।
  11. 11गुरु मंत्र: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः'।
  12. 12दक्षिणामूर्ति (ज्ञान के गुरु शिव) पूजा।
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