विस्तृत उत्तर
जाम्बूनद स्वर्लोक का एक विशेष और अत्यंत दिव्य स्वर्ण है। मेरुमंदराचल पर्वत पर जम्बू वृक्ष के विशाल फल जो हाथियों के आकार के होते हैं वे 10,000 योजन की ऊँचाई से गिरते हैं और उनके रस से जम्बू-नदी बहती है। इन नदियों के तटों की मिट्टी जब इस दिव्य रस से सराबोर होती है और सूर्य तथा वायु के संपर्क में आती है तो वह सूखकर एक विशेष प्रकार के स्वर्ण में परिवर्तित हो जाती है जिसे 'जाम्बूनद' स्वर्ण कहा जाता है। स्वर्ग की देवियां और विद्याधर इसी जाम्बूनद स्वर्ण का उपयोग अपने मुकुट, कंगन, करधनी और अन्य दिव्य आभूषणों के निर्माण के लिए करते हैं। अमरावती नगरी का निर्माण भी इसी जाम्बूनद स्वर्ण से हुआ है।
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