विस्तृत उत्तर
बृहस्पति (गुरु) ग्रह ज्ञान, धर्म, सम्पत्ति, संतान और विवाह का कारक है। कुंडली में गुरु अशुभ होने पर शिक्षा में बाधा, विवाह में देरी, संतान कष्ट, आर्थिक हानि हो सकती है।
गुरु ग्रह शांति पूजा की विधि
1. शुभ दिन: गुरुवार सर्वोत्तम। पुष्य नक्षत्र विशेष शुभ।
2. गुरु यंत्र स्थापना: पीले वस्त्र पर बृहस्पति यंत्र की स्थापना।
3. मंत्र जप: बृहस्पति बीज मंत्र — 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' का 19,000 जप। वैदिक मंत्र: 'ॐ बृहस्पतेऽअतियदर्यो अर्हाद्द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।'
4. हवन: पीपल की समिधा से हवन। पीले तिल, चने की दाल, केसर, घी की आहुतियाँ।
5. विष्णु पूजन: बृहस्पति के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। विष्णु सहस्रनाम पाठ, विष्णु पूजा गुरु शांति में सहायक।
6. दान: पीला वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, केसर, पुखराज रत्न (ज्योतिषी सलाह), पीले फूल, केला, गुड़, सोना (यथाशक्ति)।
7. गुरुवार व्रत: गुरुवार का व्रत रखें। पीले वस्त्र धारण करें। केले के वृक्ष की पूजा करें।
8. गुरु स्तोत्र: 'देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्।'
विशेष: गुरु की महादशा 16 वर्ष की होती है। गुरुवार को पीपल वृक्ष में जल और हल्दी अर्पित करना भी गुरु शांति का सरल उपाय है।





