विस्तृत उत्तर
राहु छाया ग्रह है जो कुंडली में अशुभ स्थिति में होने पर भ्रम, अचानक विपत्ति, मानसिक अशांति, विदेश यात्रा सम्बंधी समस्या, और सर्प दोष उत्पन्न करता है।
राहु दोष निवारण पूजा की विधि
1. शुभ समय: राहुकाल में या शनिवार/बुधवार को पूजा शुभ मानी जाती है।
2. राहु यंत्र स्थापना: नीले/काले वस्त्र पर राहु यंत्र की स्थापना।
3. मंत्र जप: राहु बीज मंत्र — 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' का 18,000 जप। वैदिक मंत्र: 'ॐ कयानश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा। कया शचिष्ठया वृता।'
4. हवन: दूर्वा (दूब घास) की समिधा से हवन। काले तिल, सरसों, उड़द की आहुतियाँ।
5. नाग पूजा: राहु को सर्प (नाग) से सम्बद्ध माना जाता है। नाग पंचमी पर विशेष पूजा लाभकारी।
6. दान: काला वस्त्र, सरसों, उड़द, नारियल, काला तिल, लोहे की वस्तु, नीलम/गोमेद रत्न (ज्योतिषी सलाह से)।
1विशेष उपाय
- ▸शनिवार को राहु काल में नारियल जल में बहाएँ।
- ▸सर्प दोष शांति हेतु नागबलि विधान (त्र्यम्बकेश्वर या रामेश्वरम में)।
- ▸दुर्गा सप्तशती का पाठ राहु शांति में सहायक।
- ▸कालसर्प दोष होने पर अलग से कालसर्प शांति पूजा।
8. राहु स्तोत्र: 'अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्। सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्।'
विशेष: राहु महादशा 18 वर्ष की होती है। इस दौरान नियमित पूजा-उपाय करते रहना लाभकारी है।





