विस्तृत उत्तर
मांगलिक दोष (कुजा दोष) तब उत्पन्न होता है जब कुंडली में मंगल ग्रह 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित हो। इसका मुख्य प्रभाव विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में कलह के रूप में माना जाता है।
मांगलिक दोष शांति पूजा की विधि
1. ज्योतिषीय पुष्टि: सबसे पहले विश्वसनीय ज्योतिषी से कुंडली में मांगलिक दोष की पुष्टि करवाएँ।
2. शुभ दिन: मंगलवार सर्वोत्तम। अन्यथा जन्म नक्षत्र के अनुसार शुभ तिथि।
3. मंगल यंत्र स्थापना: लाल वस्त्र पर मंगल यंत्र की स्थापना और पूजा।
4. मंत्र जप: मंगल बीज मंत्र — 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' का 10,000 जप। अथवा 'ॐ अं अंगारकाय नमः' का जप।
5. हवन: खैर (खदिर) की समिधा, लाल चन्दन, लाल पुष्प, गुड़, मसूर दाल से हवन। दशांश आहुतियाँ।
6. कुंभ विवाह (विशेष उपाय): मांगलिक व्यक्ति का विवाह से पूर्व एक मिट्टी के कुम्भ (घड़े) या पीपल/केले के वृक्ष से प्रतीकात्मक विवाह करवाया जाता है। इसे 'कुंभ विवाह' कहते हैं।
7. हनुमान पूजा: हनुमान जी मंगल के अधिपति देवता माने जाते हैं। मंगलवार को हनुमान चालीसा पाठ, सुन्दरकाण्ड पाठ, हनुमान मंदिर में सिन्दूर-तेल चढ़ाना।
8. दान: लाल मसूर, लाल वस्त्र, गुड़, लाल मूँगा, ताँबे के बर्तन, गेहूँ का दान।
विशेष स्थान
- ▸उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर — मंगल ग्रह उत्पत्ति स्थल माना जाता है। यहाँ 'भात पूजा' (मांगलिक दोष निवारण) सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रभावी है।
अतिरिक्त उपाय: मंगलवार व्रत, लाल मूँगा रत्न धारण (ज्योतिषी परामर्श से), हनुमान मंदिर में नियमित दर्शन।
ध्यान दें: मांगलिक दोष पर विद्वानों में मतभेद है। कई ज्योतिषी मानते हैं कि 28 वर्ष की आयु के बाद यह दोष स्वतः क्षीण हो जाता है। विश्वसनीय ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।





