विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, एक स्वस्थ मनुष्य 24 घंटों में लगभग 21,600 बार श्वास लेता है। दिन के 12 घंटे हम सांसारिक कार्यों में व्यतीत करते हैं, जिनमें लगभग 10,800 श्वासें व्यय हो जाती हैं। शेष 12 घंटे आध्यात्मिक साधना और विश्राम के लिए होते हैं, जिनमें 10,800 श्वासें शेष रहती हैं।
शास्त्रों का निर्देश है कि मनुष्य को अपनी प्रत्येक श्वास के साथ ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। परन्तु, हर साधक के लिए 10,800 बार जप करना संभव नहीं है।
अतः, ऋषियों ने करुणावश इस संख्या में से अंतिम दो शून्य हटाकर 108 की संख्या को जप के लिए निर्धारित कर दिया। इस प्रकार, 108 बार किया गया जप 10,800 श्वासों द्वारा किए गए स्मरण का पुण्य फल प्रदान करता है।





