विस्तृत उत्तर
यह प्रश्न सहज ही उठता है कि जपमाला में 108 मनके ही क्यों होते हैं? यह संख्या कोई आकस्मिक चयन नहीं है, अपितु इसके पीछे गहन खगोलीय, ज्योतिषीय, शारीरिक और आध्यात्मिक विज्ञान छिपा है। यह पवित्र संख्या व्यक्ति (व्यष्टि) को ब्रह्मांड (समष्टि) के साथ एक लय में स्थापित करती है।
हमारे ऋषियों ने ब्रह्मांड को एक जीवंत इकाई के रूप में देखा और पाया कि संख्या 108 ब्रह्मांडीय गणित की आधारशिला है।
ज्योतिष शास्त्र: 12 राशियों को 9 ग्रहों से गुणा करने पर 108 आता है (12×9=108)।
नक्षत्र विज्ञान: 27 नक्षत्रों के 4 चरण = 108 (27×4=108)।
श्वास विज्ञान: 10,800 आध्यात्मिक श्वासों में से अंतिम दो शून्य हटाकर 108 निर्धारित।
सूर्य की कलाएं: सूर्य की एक अयन में 1,08,000 कलाओं में से तीन शून्य हटाकर 108।
शिव पुराण: 108 दानों की माला को 'सर्वसिद्धिदायक' कहा गया है।





