विस्तृत उत्तर
सत्यलोक को भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच का अन्तिम सर्वोच्च सेतु इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह भौतिक ब्रह्माण्ड का सर्वोच्च बिंदु है और इसके ठीक ऊपर शाश्वत चिदाकाश (वैकुण्ठ) का आरंभ होता है। एक तरफ महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और अंततः सत्यलोक — यह सम्पूर्ण उन्नयन क्रम भौतिक जगत का ही अंग है जो प्रलय के अधीन है। दूसरी तरफ सत्यलोक के ठीक ऊपर से शाश्वत वैकुण्ठ का आरम्भ होता है जो प्रलय से सर्वथा मुक्त है। सत्यलोक में जो जीव पहुँचते हैं वे यहाँ ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके भौतिकता को पूर्णतः त्यागने की अवस्था में आते हैं। महाप्रलय में सत्यलोक नष्ट होने पर वे इसी सेतु को पार करते हुए शाश्वत वैकुण्ठ में प्रवेश करते हैं। इसी कारण सत्यलोक भौतिक और आध्यात्मिक जगत का अन्तिम सेतु है।
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