विस्तृत उत्तर
नवरात्रि के प्रथम दिन (चैत्र या आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) को 'कलश स्थापना' या घटस्थापना की जाती है। शास्त्रानुसार, कलश केवल जल भरने का एक मिट्टी या धातु का पात्र नहीं है; यह संपूर्ण ब्रह्मांड (हिरण्यगर्भ) और मानव शरीर का सूक्ष्म प्रतीक है।
घटस्थापना के माध्यम से साधक पञ्चमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को एक विशिष्ट अनुपात में संतुलित करता है। कलश के भीतर का जल जीवन का, मिट्टी पृथ्वी तत्त्व का, और कलश के ऊपर रखा नारियल मानव चेतना (सहस्रार चक्र) का प्रतीक है।
इस अनुष्ठान के द्वारा निर्गुण, निराकार परब्रह्म की महाशक्ति को एक सगुण, साकार रूप (कलश) में आवाह्न कर नौ दिनों तक उसकी उपासना की जाती है।





