विस्तृत उत्तर
यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे' — यह सनातन सिद्धांत कहता है कि जो ब्रह्मांड में है, वही इस पिंड (शरीर) में है।
जिन पंच महाभूतों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — से यह सृष्टि बनी है, उन्हीं से हमारा शरीर भी बना है। शरीर में इन तत्वों का संतुलन ही स्वास्थ्य और असंतुलन ही रोग है।
चक्रों के बीज मंत्र सीधे इन पंचतत्वों से जुड़े हैं।





