विस्तृत उत्तर
पंचमहाभूतों के प्रतीकों के माध्यम से, शिष्य अपने संपूर्ण अस्तित्व को उस विराट सत्ता को अर्पित कर देता है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुआ है।
- ▸गंध (पृथ्वी): शुद्ध आचरण, चरित्र एवं देह-भाव
- ▸पुष्प (आकाश): निर्मल भाव, भक्ति एवं चेतना
- ▸धूप (वायु): समस्त कामनाएं एवं मानसिक वृत्तियाँ
- ▸दीप (अग्नि): आत्मा, प्रज्ञा एवं व्यक्तिगत चेतना
यह 'तेरा तुझको अर्पण' के परम भाव की जीवंत अभिव्यक्ति है। शिष्य न केवल देवताओं और गुरु-मंडल का आशीर्वाद प्राप्त करता है, बल्कि अपनी पात्रता भी सिद्ध करता है।





