📖
विस्तृत उत्तर
छब्बीस तत्त्वों को सात, आठ और फिर ग्यारह रूपों वाले लिंगतत्त्व के रूप में बताया गया है। वर्णन में महत्तत्त्व, अहंकार, शब्द-स्पर्श आदि तन्मात्राएँ, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी, पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और उभयात्मक मन आते हैं। इन्हीं तत्त्वों से सृष्टि-क्रम आगे बढ़ता है और अण्ड की उत्पत्ति कही गई है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 20-23, श्लोक 5 और 17-28
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





