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विस्तृत उत्तर
आकाश की उत्पत्ति तामस अहंकार से बताई गई है। तामस अहंकार से शब्द तन्मात्रावाला अव्यय आकाश उत्पन्न हुआ। फिर शब्द के कारणरूप अहंकार ने शब्दयुक्त आकाश को व्याप्त कर लिया। भूतसर्ग की शुरुआत इसी आकाश से होती है और आगे आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल तथा जल से पृथ्वी उत्पन्न होती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22, श्लोक 19
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