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विस्तृत उत्तर
वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी की उत्पत्ति क्रम से बताई गई है। आकाश से स्पर्श तन्मात्रावाला महान् वायु उत्पन्न हुआ। वायु से रूप तन्मात्रावाली अग्नि उत्पन्न हुई। अग्नि से रस तन्मात्रावाले जल का प्रादुर्भाव हुआ। फिर रस तन्मात्रावाले जल से गन्ध तन्मात्रावाली कल्याणमयी पृथ्वी उत्पन्न हुई।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 22-23, श्लोक 19-21
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