विस्तृत उत्तर
वरुणास्त्र उन दिव्यास्त्रों की श्रेणी में आता है जो प्राकृतिक शक्तियों जैसे जल, अग्नि और वायु का आह्वान करते हैं। इसका उल्लेख विभिन्न पौराणिक ग्रंथों जैसे महाभारत (विशेषकर द्रोण पर्व और कर्ण पर्व) और संभवतः कुछ रामायण के संस्करणों में मिलता है। यह एक मंत्रों द्वारा जागृत और देवताओं की शक्तियों से युक्त अलौकिक अस्त्र है। इसका प्रयोग धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए किया जाता था और इसे प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या और गुरु की कृपा आवश्यक थी।
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