विस्तृत उत्तर
तैजस ऐश्वर्य तेज से जुड़ी योगजन्य शक्तियों का वर्णन है। पाठ में देह से अग्नि निर्माण, अग्नि के ताप-भय से रहित रहना, दग्ध लोक को योगविधि से पूर्ववत कर देना, जल के भीतर अग्नि स्थापित करके रखना, हाथ से आग पकड़ लेना, स्मरण मात्र से अग्नि प्रकट कर देना, भस्म पदार्थ को इच्छानुसार पहले जैसा कर देना और दो तत्त्वों से देह धारण करना तैजस ऐश्वर्य कहा गया है। ये चौबीस गुणों वाले तैजस ऐश्वर्य हैं।
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