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विस्तृत उत्तर
प्रजापति संबंधी ऐश्वर्य आहंकारिक ऐश्वर्य कहे गए हैं। पाठ में छेदन, ताडन, बन्ध, संसारपरिवर्तन, सर्वभूतप्रसाद, मृत्यु तथा काल का जय प्रजापति सम्बन्धी श्रेष्ठ आहंकारिक ऐश्वर्य बताया गया है। ये शक्तियाँ अत्यन्त ऊँची योगजन्य उपलब्धियों की तरह वर्णित हैं, पर आगे स्पष्ट किया गया है कि ऐसे चौंसठ गुण व्यवहारकाल में सिद्धियाँ और समाधिकाल में उपसर्ग हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 55, श्लोक 46-47
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