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विस्तृत उत्तर
विषय भोगों को नश्वर इसलिए समझना चाहिए क्योंकि वे भय उत्पन्न करने वाले और अवश्यम्भावी नाश के अधीन हैं। पाठ में कहा गया है कि विषयभोगों की नश्वरता जानकर सबका अश्रद्धा से त्याग कर देना चाहिए। ऐसा करने वाला विरक्त कहा जाता है। यह वैराग्य साधक को औपसर्गिक सिद्धियों और भोगों के आकर्षण से बचाकर महेश्वर की प्रसन्नता और मुक्ति की दिशा में ले जाता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 56, श्लोक 53
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