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औपसर्गिक ऐश्वर्य📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53-55, श्लोक 22-52⏱ 1 मिनट पठन

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

आठ गुण वृद्धि क्रम से बढ़कर चौंसठ गुण कहे गए हैं; ये पार्थिव, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, अहंकार और ब्राह्म ऐश्वर्य से जुड़े हैं।

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विस्तृत उत्तर

योग में आने वाले चौंसठ गुण वे औपसर्गिक गुण हैं जो वृद्धिक्रम से बढ़ते हैं। पाठ में आठ गुणों के बढ़कर चौंसठ होने की बात कही गई है। पिशाचलोक में पार्थिव, राक्षसलोक में जल, यक्षलोक में तेज, गन्धर्वलोक में वायु, इन्द्रलोक में आकाश, सोमलोक में मन, प्रजापतिलोक में अहंकार और ब्रह्मलोक में सर्वोत्तम बोधगुण बताए गए हैं। व्यवहार में ये सिद्धियाँ कही जाती हैं, पर समाधि में उपसर्ग यानी विघ्न बनती हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53-55, श्लोक 22-52
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं को संदर्भ सहित समझें

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं का सबसे सीधा सार यह है: आठ गुण वृद्धि क्रम से बढ़कर चौंसठ गुण कहे गए हैं; ये पार्थिव, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, अहंकार और ब्राह्म ऐश्वर्य से जुड़े हैं।

औपसर्गिक ऐश्वर्य जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53-55, श्लोक 22-52 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 53-55, श्लोक 22-52 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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