विस्तृत उत्तर
योग में आने वाले चौंसठ गुण वे औपसर्गिक गुण हैं जो वृद्धिक्रम से बढ़ते हैं। पाठ में आठ गुणों के बढ़कर चौंसठ होने की बात कही गई है। पिशाचलोक में पार्थिव, राक्षसलोक में जल, यक्षलोक में तेज, गन्धर्वलोक में वायु, इन्द्रलोक में आकाश, सोमलोक में मन, प्रजापतिलोक में अहंकार और ब्रह्मलोक में सर्वोत्तम बोधगुण बताए गए हैं। व्यवहार में ये सिद्धियाँ कही जाती हैं, पर समाधि में उपसर्ग यानी विघ्न बनती हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





