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विस्तृत उत्तर
जल, अग्नि, वायु और आकाश के गुण क्रम से बताए गए हैं। गन्धरहित शेष चार गुणों से जल युक्त है। अग्नि तीन गुणों से युक्त है। स्पर्शसमन्वित वायु दो गुणों से युक्त है। आकाशदेव अन्य अवयवों से रहित मात्र एक गुण वाला बताया गया है। इस तरह तन्मात्राओं के पारस्परिक संयोग से भूतसर्ग समझाया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 3, PDF पृष्ठ 23, श्लोक 24-25
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