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गुण से जुड़े सभी प्रश्न(11)

गुण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 11 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र विधि

सात्विक मंत्र और तामसिक मंत्र में क्या अंतर है?

सात्विक: ज्ञान/मोक्ष/शांति (गायत्री, महामृत्युंजय) — शुद्ध, प्रकाश। राजसिक: धन/सत्ता/यश — बंधनकारी। तामसिक: मारण/उच्चाटन/हानि — विनाशकारी, पाप। गीता: 'सत्त्वात् ज्ञानम्'। सामान्य: सदा सात्विक।

#सात्विक#तामसिक#राजसिक
प्रलय

सृष्टि और प्रलय का कारण क्या बताया गया है?

गुणों की विषमता से सृष्टि और गुणों के साम्य से प्रलय बताया गया है; दोनों का हेतु महेश्वर हैं।

#सृष्टि#प्रलय#गुण
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में कौन से गुण अपनाने चाहिए?

सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदार मन का आचरण करने को कहा गया है।

#गुण#भागवत सप्ताह#सत्य
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में मन कैसे रखें?

मन को शुद्ध, चिंता-रहित, कथा में लगाकर रखना चाहिए और काम, क्रोध, लोभ, दंभ, मोह, द्वेष आदि से दूर रखना चाहिए।

#मन#भागवत सप्ताह#एकाग्रता
सृष्टि तत्त्व

जल अग्नि वायु और आकाश में कितने गुण होते हैं?

जल चार गुणों से, अग्नि तीन गुणों से, वायु दो गुणों से और आकाश एक गुण से युक्त बताया गया है।

#जल#अग्नि#वायु
प्रकृति तत्त्व

अजा प्रकृति क्या है?

अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति है, जो बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है।

#अजा#प्रकृति#शैवी शक्ति
प्रकृति तत्त्व

प्रकृति शैवी कैसे हुई?

शिव की दृष्टिमात्र से प्रकृति शैवी हो गई और सृष्टि के समय गुणों से युक्त हुई।

#प्रकृति#शैवी#शिव दृष्टि
शिव तत्त्व

सदाशिव से ब्रह्मा विष्णु और कालरुद्र कैसे प्रकट होते हैं?

सदाशिव से रजोगुण के आश्रय से ब्रह्मा, सत्त्व के आश्रय से विष्णु और तमोगुण के आश्रय से कालरुद्र का प्रादुर्भाव बताया गया है।

#सदाशिव#ब्रह्मा#विष्णु
गुण और देव रूप

हिरण्यगर्भ क्या है?

हिरण्यगर्भ वह स्वरूप है जो रजोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।

#हिरण्यगर्भ#रजोगुण#ब्रह्मा
गृहस्थ धर्म

सात्विक जीवनशैली कैसे अपनाएं

आहार: शाकाहारी/ताजा। दिनचर्या: ब्रह्म मुहूर्त/योग/ध्यान। व्यवहार: सत्य/दया/क्षमा। संगति: सत्संग। गीता 17.3: जैसी श्रद्धा=वैसा व्यक्ति।

#सात्विक#जीवनशैली#गुण
ज्योतिष दोष एवं उपाय

कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए

36 में से 18+ = विवाह योग्य; 24+ = अच्छा; 30+ = उत्तम। नाड़ी दोष (8 अंक) सबसे गंभीर — 0 हो तो 28+ भी चिंतनीय। गुण संख्या < विशिष्ट दोष। उत्तर = अष्टकूट; दक्षिण = दशकूट।

#कुंडली मिलान#गुण#अष्टकूट
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