विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में केवल परहेज ही नहीं, बल्कि सकारात्मक गुण भी अपनाने को कहा गया है। श्रोता को सदा सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदार मन का व्यवहार करना चाहिए। ये गुण कथा-श्रवण को भीतर से फलदायी बनाते हैं। इसके पहले काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को त्यागने का निर्देश है। निंदा से बचना और अनुचित संग से दूर रहना भी कहा गया है। इसलिए सप्ताह-व्रत का स्वरूप मन, वाणी और आचरण तीनों का शोधन है। सत्य और शौच मन को साफ करते हैं, दया और उदारता हृदय खोलती है, मौन व्यर्थ वाणी को रोकता है, सरलता और विनय कथा-रस ग्रहण करने योग्य बनाते हैं।
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