विस्तृत उत्तर
वायु तत्त्व का बीज मंत्र 'यं' (Yam) है।
यह अनाहत चक्र से संबद्ध है।
इन बीज मंत्रों की साधना द्वारा साधक अपने शरीर में स्थित पंचतत्वों को शुद्ध और संतुलित करता है, जिससे न केवल आरोग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि वह ब्रह्मांडीय तत्वों के साथ भी सामंजस्य स्थापित कर लेता है।





