विस्तृत उत्तर
यह प्रसंग एक सयानी (चतुर) सखी का है जो सीताजी के अत्यन्त निकट थी। उसी सखी ने सीताजी को रामजी के बारे में बताया और उनके दर्शन कराये।
बालकाण्ड में कहा — 'तासु बचन अति सियहि सोहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने। चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई॥'
अर्थ — उसके वचन सीताजीको अत्यन्त ही प्रिय लगे और दर्शनके लिये उनके नेत्र अकुला उठे। उसी प्यारी सखीको आगे करके सीताजी चलीं। पुरानी प्रीतिको कोई लख नहीं पाता।
यह सखी सीताजी और रामजी के प्रथम मिलन में माध्यम बनी — उसने सीताजी को रामजी दिखाये और गिरिजा-पूजन के बहाने दर्शन कराया। 'प्रीति पुरातन' — जन्म-जन्मान्तर का प्रेम — इसका संकेत है कि यह सम्बन्ध शाश्वत है।





