का सरल उत्तर
एक चतुर-सयानी प्रिय सखी — जिसने सीताजी को रामजी के बारे में बताया। उसके वचन सीताजी को प्रिय लगे, नेत्र अकुलाये। उसी सखी को आगे कर सीताजी चलीं। 'प्रीति पुरातन लखइ न कोई' — जन्म-जन्मान्तर का प्रेम।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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