रामचरितमानस — बालकाण्ड'प्रेम बिबस सीता पहिं आई' — कौन प्रेमविह्वल होकर सीताजी के पास आई?एक चतुर-सयानी प्रिय सखी — जिसने सीताजी को रामजी के बारे में बताया। उसके वचन सीताजी को प्रिय लगे, नेत्र अकुलाये। उसी सखी को आगे कर सीताजी चलीं। 'प्रीति पुरातन लखइ न कोई' — जन्म-जन्मान्तर का प्रेम।#बालकाण्ड#सखी#सीता
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी की सखियों ने पार्वती मूर्ति का हिलना देखकर क्या कहा?सखियों ने पार्वती मूर्ति को प्रसन्न होते (हिलते/मुस्कुराते) देखकर कहा कि देवी प्रसन्न हुईं — सीताजी का मनोरथ पूरा होगा, मनवांछित वर मिलेंगे। सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।
रामचरितमानस — बालकाण्डकिस सखी ने सीताजी को श्रीराम-लक्ष्मण के बारे में बताया?एक चतुर सयानी सखी ने — 'धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी' — हाथ पकड़कर कहा कि गिरिजा पूजन बाद में, पहले राजकुमार को देख लो। सखी के वचन सीताजी को अत्यन्त प्रिय लगे।#बालकाण्ड#सखी#सीता