विस्तृत उत्तर
वैदेही' नाम इसलिये पड़ा क्योंकि सीताजी विदेह (जनक) कुल में उत्पन्न हुईं। 'विदेह' + 'ई' = 'वैदेही' (विदेह कुल की कन्या)।
बालकाण्ड में — 'बैदेही मुख पतर दीन्हे। होइ दोषु बड़ अनुचित कीन्हे' — जानकीजीके मुखकी तुझे उपमा देनेमें बड़ा अनुचित कर्म करनेका दोष लगेगा (चन्द्रमा को सम्बोधित)।
जनक वंश को 'विदेह वंश' कहते हैं क्योंकि इस वंश के राजा देह में रहकर भी विरक्त (देह-भाव से परे) रहते थे। सीताजी इसी कुल की होने से 'वैदेही' कहलाती हैं।





