'यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे' का क्या अर्थ है?
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सरल उत्तर
'यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे' = जो ब्रह्मांड में है वही शरीर में है। पंच महाभूतों से सृष्टि और शरीर दोनों बने हैं। शरीर में इन तत्वों का संतुलन = स्वास्थ्य, असंतुलन = रोग। चक्रों के बीज मंत्र इन्हीं पंचतत्वों से जुड़े हैं।
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पंचतत्व और बीज मंत्र
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