विस्तृत उत्तर
श्रीमद्देवी भागवत पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, नवरात्रि का अनुष्ठान 'कन्या पूजन' (कुमारी पूजन) के बिना सर्वथा अपूर्ण और फलहीन माना जाता है। अष्टमी (महाष्टमी) और नवमी (महानवमी) के दिन कन्याओं को आद्याशक्ति का साक्षात् स्वरूप मानकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है।
देवी भागवत पुराण कहता है कि जो साधक ज्ञान का अभिलाषी है, उसे कुमारी का पूजन करना चाहिए। कन्याओं के गृह प्रवेश पर पुष्प वर्षा की जाती है, उनके चरण धोए जाते हैं, कुमकुम का टीका लगाया जाता है और उन्हें विशेष भोग (अष्टमी को हलवा-पूरी और चना, तथा नवमी को तिल या खीर) अर्पित किया जाता है।
शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि कन्या पूजन में सभी वर्गों और जातियों की कन्याएँ समान रूप से पूजनीय हैं ('कन्या पूज्या पूज्यतमा सर्वाह')।





