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कुमारी पूजन से जुड़े सभी प्रश्न(3)

कुमारी पूजन पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

नवरात्रि और उपासना

कन्या पूजन (कुमारी पूजन) का क्या महत्व है?

कन्या पूजन के बिना नवरात्रि अपूर्ण। महाष्टमी-महानवमी पर कन्याओं को आद्याशक्ति का साक्षात् स्वरूप मानकर पूजा। चरण धोना, कुमकुम टीका, हलवा-पूरी-चना (अष्टमी), तिल-खीर (नवमी)। 'कन्या पूज्या पूज्यतमा सर्वाह' — सभी जातियों की कन्याएं समान रूप से पूजनीय।

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कन्या पूजन

मासिक दुर्गाष्टमी पर कुमारी (कन्या) पूजन कैसे करें?

कन्या के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं, माथे पर तिलक लगाएं और भोजन (हलवा, पूरी, चना) कराएं। बाद में लाल वस्त्र या फल और दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।

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नवरात्रि विधि

नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?

कन्या में देवी का अंश होता है — 1-9 वर्ष की कन्याएं नवदुर्गा के नौ रूपों की प्रतीक हैं। अष्टमी या नवमी को 2-10 कन्याओं के चरण धोएं, तिलक लगाएं, हलवा-पूरी-चना भोजन कराएं और दक्षिणा दें। कन्या पूजन से सभी देवता प्रसन्न होते हैं।

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