विस्तृत उत्तर
स्नान के जल में हल्दी डालकर नहाएं और पीले वस्त्र पहनें। ईशान कोण में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी/बृहस्पति देव की प्रतिमा और केले का पौधा रखें। कलश स्थापित करें। पंचामृत और केसर युक्त जल से अभिषेक कराएं। हल्दी व चंदन का तिलक लगाएं, 'ॐ बृहस्पतये नमः' कहते हुए पीले फूल अर्पित करें। केले की जड़ में चने की दाल-गुड़ व जल चढ़ाएं और बेसन के लड्डू/हलवे का भोग तुलसी दल के साथ लगाएं। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती और व्रत कथा का पाठ करें।





