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घटस्थापना से जुड़े सभी प्रश्न(7)

घटस्थापना पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

कलश स्थापना सामग्री

कलश स्थापना में क्या-क्या सामग्री चाहिए?

कलश स्थापना सामग्री: मिट्टी का पात्र + तांबे/पीतल का कलश, सप्तधान्य, सप्तमृत्तिका, गंगाजल, सुपारी, दूर्वा, अक्षत, सर्वौषधि, आम/अशोक के 5-7 पत्ते, पूर्णपात्र, जटा नारियल, लाल चुनरी, मौली, पुष्प, चंदन, कुमकुम, धूप-दीप, नैवेद्य।

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नवरात्रि और कलश स्थापना परिचय

नवरात्रि में कलश स्थापना क्यों करते हैं?

कलश स्थापना = पंचमहाभूतों को संतुलित कर निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करना। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ मानवीय चेतना का तादात्म्य स्थापित करने का वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान है।

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नवरात्रि और उपासना

कलश स्थापना (घटस्थापना) का क्या रहस्य है?

कलश = संपूर्ण ब्रह्मांड (हिरण्यगर्भ) और मानव शरीर का सूक्ष्म प्रतीक। पंचमहाभूत संतुलन: जल = जीवन; मिट्टी = पृथ्वी तत्त्व; नारियल = मानव चेतना (सहस्रार चक्र)। इसके द्वारा निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करते हैं।

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देवी उपासना

नवरात्रि में घट स्थापना के बाद कलश गिर जाए तो क्या करें

कलश गिरे तो: (1) उठाएँ, शुद्ध करें। (2) पुनः जल + गंगाजल + सामग्री भरकर मंत्रपूर्वक स्थापित। (3) 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार + गायत्री 108 + क्षमा प्रार्थना। (4) टूटे तो नया कलश। (5) व्रत जारी रखें — भंग नहीं। माँ कृपालु हैं, श्रद्धा प्रधान।

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त्योहार पूजा

नवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?

कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।

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पर्व

नवरात्रि में ज्वारा बोने की विधि क्या है

नवरात्रि ज्वारा: प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ — मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी + जौ/गेहूँ बीज → जल छिड़कें → 9 दिन अँधेरे में (सुबह-शाम जल) → 5-7 इंच अंकुर → नवमी/दशमी को निकालें → प्रसाद (कान पर लगाएँ) + विसर्जन। ज्वारा = शक्ति जागृति, सौभाग्य प्रतीक।

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नवरात्रि

नवरात्रि में घटस्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रतिपदा प्रातः। वेदी+जौ/गेहूं बोएं → कलश (जल+आम पत्ते+नारियल) → अखंड ज्योति → देवी प्रतिमा → षोडशोपचार। 9 दिन बाद जौ अंकुरण = सफलता संकेत। मुहूर्त: अभिजित/पंचांग अनुसार।

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