कलश स्थापना सामग्रीकलश स्थापना में क्या-क्या सामग्री चाहिए?कलश स्थापना सामग्री: मिट्टी का पात्र + तांबे/पीतल का कलश, सप्तधान्य, सप्तमृत्तिका, गंगाजल, सुपारी, दूर्वा, अक्षत, सर्वौषधि, आम/अशोक के 5-7 पत्ते, पूर्णपात्र, जटा नारियल, लाल चुनरी, मौली, पुष्प, चंदन, कुमकुम, धूप-दीप, नैवेद्य।#कलश स्थापना सामग्री#घटस्थापना#सूची
नवरात्रि और कलश स्थापना परिचयनवरात्रि में कलश स्थापना क्यों करते हैं?कलश स्थापना = पंचमहाभूतों को संतुलित कर निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करना। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ मानवीय चेतना का तादात्म्य स्थापित करने का वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान है।
नवरात्रि और उपासनाकलश स्थापना (घटस्थापना) का क्या रहस्य है?कलश = संपूर्ण ब्रह्मांड (हिरण्यगर्भ) और मानव शरीर का सूक्ष्म प्रतीक। पंचमहाभूत संतुलन: जल = जीवन; मिट्टी = पृथ्वी तत्त्व; नारियल = मानव चेतना (सहस्रार चक्र)। इसके द्वारा निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करते हैं।#कलश स्थापना#घटस्थापना#पंचमहाभूत
देवी उपासनानवरात्रि में घट स्थापना के बाद कलश गिर जाए तो क्या करेंकलश गिरे तो: (1) उठाएँ, शुद्ध करें। (2) पुनः जल + गंगाजल + सामग्री भरकर मंत्रपूर्वक स्थापित। (3) 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार + गायत्री 108 + क्षमा प्रार्थना। (4) टूटे तो नया कलश। (5) व्रत जारी रखें — भंग नहीं। माँ कृपालु हैं, श्रद्धा प्रधान।#नवरात्रि#कलश#घटस्थापना
त्योहार पूजानवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।#नवरात्रि#कलश स्थापना#घटस्थापना
पर्वनवरात्रि में ज्वारा बोने की विधि क्या हैनवरात्रि ज्वारा: प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ — मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी + जौ/गेहूँ बीज → जल छिड़कें → 9 दिन अँधेरे में (सुबह-शाम जल) → 5-7 इंच अंकुर → नवमी/दशमी को निकालें → प्रसाद (कान पर लगाएँ) + विसर्जन। ज्वारा = शक्ति जागृति, सौभाग्य प्रतीक।#नवरात्रि#ज्वारा#घटस्थापना
नवरात्रिनवरात्रि में घटस्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त क्या है?प्रतिपदा प्रातः। वेदी+जौ/गेहूं बोएं → कलश (जल+आम पत्ते+नारियल) → अखंड ज्योति → देवी प्रतिमा → षोडशोपचार। 9 दिन बाद जौ अंकुरण = सफलता संकेत। मुहूर्त: अभिजित/पंचांग अनुसार।#घटस्थापना#कलश#विधि