पूजा विधि एवं कर्मकांडशिव जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा हैशिव के दो सर्वप्रभावी मंत्र — दैनिक जप के लिए 'ॐ नमः शिवाय' (यजुर्वेद, पंचाक्षरी), और संकट-रोग-भय निवारण के लिए महामृत्युंजय — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्...' (ऋग्वेद)।#शिव मंत्र#महामृत्युंजय मंत्र#पंचाक्षर मंत्र
नाम महिमा एवं भक्तिशिव नाम जपने से क्या होता है'ॐ नमः शिवाय' यजुर्वेद का पंचाक्षरी मंत्र है जिसके पाँच अक्षर पाँच तत्वों के प्रतीक हैं। शिव जप से तीनों तापों से मुक्ति मिलती है। शिव 'आशुतोष' हैं — शीघ्र प्रसन्न होने वाले — इसलिए उनका नाम जपने से शीघ्र कृपा मिलती है।
मंत्र जप'ॐ नमः शिवाय' का असली अर्थ क्या है?'ॐ' = प्रपंच सागर पार करने वाली नौका (सूक्ष्म प्रणव)। 'नमः' = अहंकार का समर्पण। 'शिवाय' = कल्याणकारी शिव को। पूर्ण अर्थ: 'मैं कल्याणकारी शिव के प्रति समर्पण करता हूँ।' इसका जप पांचों क्लेश भस्म करता है।#ॐ नमः शिवाय अर्थ#पंचाक्षर मंत्र#प्रणव
श्रीरुद्रम'ॐ नमः शिवाय' मंत्र कहाँ से आया — किस वेद में है?'ॐ नमः शिवाय' = नमकम् के अष्टम अनुवाक से। यजुर्वेद (कृष्ण यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता)। इस अनुवाक में शिव-उमा को नमन, शत्रुनाश और मोक्ष के लिए विशेष रूप से जपा जाता है।#ॐ नमः शिवाय#नमकम् अष्टम अनुवाक#यजुर्वेद
मंत्र और स्तुतिमाँ पार्वती के पंचाक्षर और अष्टाक्षर मंत्र क्या हैं?पंचाक्षर: 'ॐ पार्वत्यै नमः'; अष्टाक्षर: 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' — दोनों अत्यंत कल्याणकारी। महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...) भी शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना का रूप है।#पंचाक्षर मंत्र#अष्टाक्षर मंत्र#ॐ पार्वत्यै
पार्वती की तपस्या और परीक्षाएंदेवर्षि नारद ने पार्वती को क्या उपदेश दिया?देवर्षि नारद ने: (1) पार्वती के विवाह का शिव से निश्चित होना बताया, (2) पंचाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का उपदेश दिया, (3) शिव की तपस्या की प्रेरणा दी। पार्वती ने राजमहल के सुख त्यागकर घोर तपस्या आरंभ की।#नारद उपदेश#पंचाक्षर मंत्र#शिव तपस्या
नमः शिवाय मंत्र परिचयनमः शिवाय को 'पंचाक्षर मंत्र' क्यों कहते हैं?'नमः शिवाय' को पंचाक्षर मंत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें पाँच अक्षर (न, म, शि, वा, य) हैं — ॐ जोड़ने पर यह 'षडाक्षर मंत्र' बनता है।#पंचाक्षर मंत्र#पाँच अक्षर#षडाक्षर
नमः शिवाय मंत्र परिचयनमः शिवाय मंत्र क्या है?नमः शिवाय भगवान शिव का आदिमंत्र है — यह केवल पाँच अक्षर नहीं बल्कि स्वयं शिव का शब्द-स्वरूप और साक्षात् नाद-विग्रह है। शिव महापुराण के अनुसार इसकी महिमा सौ करोड़ वर्षों में भी नहीं कही जा सकती।#नमः शिवाय#पंचाक्षर मंत्र#शिव आदिमंत्र
मंत्र और स्तोत्रप्रदोष काल में जपने वाले प्रमुख मंत्र और 'प्रदोष स्तोत्र' (स्कंद पुराण) क्या है?#प्रदोष स्तोत्र#महामृत्युंजय मंत्र#पंचाक्षर मंत्र